Oct 2, 2011

बस कुछ यूँ ही

चाँद बनने की तमन्ना भी रखते हैं
और धब्बों से परहेज़ भी करते हैं
आसमान छूने की ख्वाहिश भी रखते हैं
और आँखों में सूरज का खौफ़ भी करते हैं
कुछ अजीब ही हैं तेरे शहर के लोग, ए यार
शोर को इज़हार समझते हैं और,
ख़ामोशी नज़रअंदाज़ करते हैं...

8 comments:

  1. क्या बात है अभिजीत भाई, बेहद खूबसूरत!!

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  2. शुक्रिया दोस्त :)

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  3. kya mast likha hai dost
    dil khush ho gaya

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  4. Did you put this up on FB, too?

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