सुना था कभी कि इंसान मिट्टी से बना है
इसीलिए शायद इसे मिट्टी से इतना लगाव है
कि आसमां के फैलाव की बजाय
ये मिट्टी की लकीरों में अपनी पहचान ढूँढता है
और रहता है तैयार मिट्टी में मिलाने को
उन सबको जो इसकी मिट्टी के दायरे के उस पार रहते हैं
सचमुच इंसान मिट्टी का ही बना होगा
वर्ना एक धड़कता दिल इतना बेपरवाह कैसे हो सकता है
(Photo Source: http://www.flickr.com/photos/danhacker/4305416079/lightbox/)

