Reflections
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Apr 24, 2011
तेरा सपना
कुछ अधूरा सा, कुछ अपना सा
तेरा सपना कल रात, इन आँखों में सिमट गया
रात की तरह ही ये मन भी अँधेरे में था
एक जुगनू की तरह वो मुझमें चमक गया
अब भला इस खूबसूरत मुलाक़ात को मैं ख्वाब कैसे कहूँ?
जब एक अनकहे पल में तू मेरी हकीकत बन गया …
Nov 20, 2010
एक और ख्वाब
आज सुबह जब एक ख्वाब से जगा,
और दिन की तरफ धीमे पाँव बढा
तो अचानक अनजाने में ही,
एक और ख्वाब के जाल में उलझ सा गया
और पूरे दिन इसी जाल में जूझता रह गया,
कभी गर्म सूरज को हथेली में क़ैद करना चाहा तो
कभी मोम के पंख लगाकर उड़ने की कोशिश की
और थक कर रात को एक और ख्वाब में खो गया
किसी एक पल में जब आज हकीकत में बैठा
तो पाया कि ज़िन्दगी बस दो तरह के ख्वाबों के बीच,
सिमट कर रह गयी है, और
आखें इतनी नींद में रहती है आजकल कि
इन्हें ख्वाबों के सिवा कुछ नज़र ही नहीं आता !!
May 16, 2009
सपने
नींद में आने वाले अनजाने ख़याल
या मेरे अंतर्मन के छुपे हुए सवाल
आंखों के परदे पर चलती तसवीरें
या खालीपन के कैनवास पर धुंधली उम्मीद की लकीरें ??????
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