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Mar 5, 2014

More random lines

सावन को गिला है आसमां से कि
"भूल जाओगे तुम मुझे मौसम बदलने के बाद"
अब ये बेचारा कैसे बताये उसे कि
महीनों इसकी आँखों पर किसकी यादों का कुहरा छाया रहता है...

Jul 16, 2012

यादों का जिन्न


एक अलसाई सी शाम को
यादों के एक चिराग पर उंगलियां जो घुमायीं तो
तो एक बीते ज़माने का जिन्न निकल आया
और पूछ बैठा कि क्या हुक्म है मेरे आका?

"कहो तो ले जाऊं एक ऐसी दुनिया में जहाँ फिक्र का नाम न हो
और रातों को हँसते खेलते सुबहों से मिलने के सिवा कुछ काम न हो
जहाँ घंटे पलों में और बरस दिनों में सिमट जाएँ
और अंत में रह जाए बस एक लम्हे कि पूरी जिंदगी"

"या ले चलूँ उस गंगा के शहर में जहाँ सब अपने से लगते थे
या मिलवा दूँ उस शख्स से एक बार फिर
जिसकी आँखों में हज़ारों सपने से रहते थे "

कुछ हैरान सा था ये देखकर मैं
कि आज भी वो दिन इस चिराग में क़ैद हैं
और अब भी ये बंधन एक पल में कैसे
मुझे आज़ाद कर जाते हैं

फिर ये सोचकर उस चिराग को दिल के किसी कोने में रख दिया
कि किसी अँधेरी रात को शायद फिर काम आ जाएगा...


May 7, 2011

The days

Written for the climax of a short film on college life.

ओस की एक बूँद एक रात अनजाने में एक पत्ते से मिल गयी
और जिसको पड़ाव समझा था वो शेह ज़िन्दगी सी बन गयी
अब तो ये भी होश नहीं की उस मोड़ के बाद ज़िन्दगी किधर गयी
एक गीत , एक हंसी और कुछ धुआं बनकर शायद हवाओं में बिखर गयी
ए दोस्त तेरे साथ , और उसकी एक हंसी से लगा सारी उलझने सुलझ गयी
चल पड़ा था जिनपर यूँ ही , वो र|हें मंजिल सी बन गयी
पर अब ये सफ़र ख़त्म होने को है
राह का मुसाफिर अपनी मंजिल पाने को है
पर जो बातें यादें बनकर इन लम्हों में गुज़र गयीं
शायद वही जीने के एहसास को पूरा कर गयीं