Sep 17, 2010

गीत की तलाश

अपने खाली से मन को भरने के लिए,
इस भारी से लम्हे का बोझ कुछ कम करने के लिए
मैं एक गीत की तलाश में कहाँ कहाँ न गया ...

कुछ अतीत की गलियाँ छानी,
जहाँ बस बीते यादों की धूल मिली
कुछ सपनो की बुनी कहानी,
जो किसी मरीचिका सी दूर रही
कभी प्रीत की डोर भी थामी
पर वो भी कुछ कमज़ोर रही
मंदिर देखे, किताबें ढूंढी,
पर निशाँ न था उसका कहीं

जब एक दिन थक हार कर बैठा
और अपने उसी खाली से मन को देखा
तो उसकी ही गहराइयों में कहीं
इसी लम्हे की गोद में बस वहीं
हर खालीपन को भरता हुआ
हर बोझ को कम करता हुआ
हर नज़र से अनदेखा हुआ
वो गीत हमेशा यहीं था
वो गीत हमेशा यहीं था ...

4 comments:

  1. You feel like penning something down..but you can't..I know the feeling. Nice one! :)

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  2. @ sushant: It's more about searching for peace which can't be found anywhere else than your own heart

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