Jan 11, 2013

परिंदे


इन सर्द रातों में कुछ परिंदे,
शहरों में,
दर बदर भटकते फिरते हैं
कांच की भट्ठियों में जलती आग,
उन्हें गर्मी नहीं देती
ढलता सूरज घरौंदों से,
उन्हें पुकारने की बजाय,
अँधेरी रात का खौफ़ दिलों में भर जाता है

छोड़ कर अपने गाँव चले आये थे जो,
कभी दाने की तलाश में,
या अपने घरों को गुम होता देख,
शहर के अज़गर की सांस में
वो परिंदे गुज़रते हैं अब
इन बर्फानी गलियों से नंगे पाँव
आँखों में एक ही सपना लिए
कि इन कंक्रीट के जंगलों में कहीं,
अपना भी एक घोंसला हो
और पंखों को भटकने अलावा,
ठहरने की भी आज़ादी मिले

Nov 30, 2012

ज़ख्म


जब वक्त की खरोंचों ने,
जिंदगी के पीतल से,
कहीं कहीं पर
सोने की परत को उतार दिया,
और दुनिया के सच को उभार दिया,
तब मन में सवाल आया कि
आखिर सच पर ये पानी चढाना क्यूँ ज़रुरी था?
क्या दुनिया के बाजार में,
हकीक़त को कोई खरीददार नहीं मिलता?
या उम्मीद थी ये कि
सोने को देख शर्म से पीतल सोना बन बैठता?
या दर्द के पूरे एहसास की खातिर
खुशी का एक अधूरा वहम ज़रुरी था?

मन अब भी
इन्ही सवालों में कहीं उलझा है,
और वो ज़ख्म
दुनिया की हवाओं से जूझ रहा है...

Oct 1, 2012

काश कि ये कलम भी बादलों सी होती,
जो बह जाती खुद-ब-खुद, 
जब दिल भारी हो पड़ता
पर इसकी तकदीर में 
शब्दों की मजबूरियां और 
दुनिया के grammar की शर्म लिखी है,
इसीलिए शायद,
इसके हिस्से की स्याही
आँखों को बहानी पड़ती है अक्सर...

Sep 18, 2012

Compilation of random lines

1. कितने भी करीने से सजा लो ज़हन की दुनिया,
    उसकी आँखों की फ़कत दो बूंदें सब उलझा देती हैं...
    (#Delhi Rains)

2. किस किस को अपनी बर्बादियों का ज़िम्मा दूँ,
    कुछ माहौल खराब थे कहीं
    कुछ मैं भी बुरा हूँ ....

3. फुर्सत है होती तब उलझ जाता हूँ अपनी जिंदगी में मैं
    पर जब जिंदगी फुर्सत नहीं देती तो चाँद बहुत प्यारा लगता है...

4. जब आखिरी बार मुड कर देखा तो कमरा खाली था
    पर क्या छोड़ जा रहा हूँ यहाँ इसका कुछ हिसाब नहीं बनता...
    (last update from XL)

5. पेड़ की टहनियों में उलझ कर चाँद, आज मेरी खिडकी के पास ही रुक गया
    मैं ये समझा की मेरी ही तरह वो भी, अपनी राह से भटक गया...

Sep 11, 2012

जंजीरों में कुछ अलग सा सुकून होगा,
जो आज़ादी की चाहत के दर्द को भुला देती हैं
भीड़ में भी कुछ अजीब ही राहत होगी,
जो अपने वुजूद की टीस को छुपा देती है,
मज़हब और मुल्क भी खुदा ने ही बनाये होंगे,
जो इंसान होने के भरम को मिटा देते हैं...