Sep 17, 2010

गीत की तलाश

अपने खाली से मन को भरने के लिए,
इस भारी से लम्हे का बोझ कुछ कम करने के लिए
मैं एक गीत की तलाश में कहाँ कहाँ न गया ...

कुछ अतीत की गलियाँ छानी,
जहाँ बस बीते यादों की धूल मिली
कुछ सपनो की बुनी कहानी,
जो किसी मरीचिका सी दूर रही
कभी प्रीत की डोर भी थामी
पर वो भी कुछ कमज़ोर रही
मंदिर देखे, किताबें ढूंढी,
पर निशाँ न था उसका कहीं

जब एक दिन थक हार कर बैठा
और अपने उसी खाली से मन को देखा
तो उसकी ही गहराइयों में कहीं
इसी लम्हे की गोद में बस वहीं
हर खालीपन को भरता हुआ
हर बोझ को कम करता हुआ
हर नज़र से अनदेखा हुआ
वो गीत हमेशा यहीं था
वो गीत हमेशा यहीं था ...

Jul 30, 2010

खामोशियाँ

लहरों की तल्ह्टों में कहीं दबी हुयी सी

तूफानों के शोर में कहीं घुली हुयी सी

दुनिया की भाग दौड़ में कहीं मिली हुयी सी

खामोशियाँ गूंजने लगी हैं आजकल कुछ इस तरह

की अपनी आवाजें सुनना मुश्किल सा होने लगा है,


अँधेरे कोनों से पुकारती हुयी सी

गर्म सी साँसों को कंपाती हुयी सी

ठहरे ख्यालों को हिलाती हुयी सी

खामोशियाँ मचलने लगी हैं आजकल कुछ इस तरह

की अब भी कुछ कहना नामुमकिन सा हो गया है...

Jun 27, 2010

दूरी


कोई साथ न होकर भी मेरे साथ-साथ चलता है,

जैसे कोई सितारा मुसाफिर के संग सारी रात चलता है

ढूंढ नहीं पाता मैं उसे दिन के उजाले में कहीं

पर हर रात वो यहीं मेरे ख्वाबों में रहता है

दूरियों का यकीन करूँ भी मैं क्यूँकर,

जब बन कर वो मुस्कान सदा इन होंठों पर रहता है...

Jun 6, 2010

तुम कह दो

बाहों में भले ही वो,
कितने तूफ़ान समेटे हो
उम्मीद की कश्ती को,
चाहे कितनी ही बार बिखेरे हो
तुम कह दो तो ये सागर अपार नहीं लगता
तूफानों से लड़ना यूँ बेकार नहीं लगता

सपनो से भी मेरे वो,
कितनी ही दूरी पर बैठा हो
छू लेने की कोशिश पर,
"नादान" कह के हँस देता हो
पर तुम कह दो तो क्षितिज पहुँच के पार नहीं लगता
सपनो का पीछा करना भी बिन सार नहीं लगता

कुछ तो जादू- मंतर है तुम्हारे इस विश्वास में
कि इस से बढ़कर तो ये संसार नहीं लगता
हालातों का मुझपर कुछ अख्तियार नहीं लगता
बस तुम कह दो तो ...

Apr 28, 2010

काश

काश की कोई जगह ऐसी भी होती

जहाँ मैं बस मैं और तुम बस तुम होते,

बीच में अनकहे लफ़्ज़ों के फ़ासले,

बेचैन सी खामोशियाँ,

और फ़िज़ूल की बातें न होती



यादें आखों से पिघल कर

आहिस्ता आहिस्ता बह जाती

और सपनो के धुंध

उस पल की रौशनी में

खुद को खो देते


काश की कोई जगह ऐसी भी होती

जहाँ मैं बस मैं और तुम बस तुम होते

और बस उस पल में वक़्त और दूरियों के फ़ासले खोते...