Jun 27, 2010

दूरी


कोई साथ न होकर भी मेरे साथ-साथ चलता है,

जैसे कोई सितारा मुसाफिर के संग सारी रात चलता है

ढूंढ नहीं पाता मैं उसे दिन के उजाले में कहीं

पर हर रात वो यहीं मेरे ख्वाबों में रहता है

दूरियों का यकीन करूँ भी मैं क्यूँकर,

जब बन कर वो मुस्कान सदा इन होंठों पर रहता है...

Jun 6, 2010

तुम कह दो

बाहों में भले ही वो,
कितने तूफ़ान समेटे हो
उम्मीद की कश्ती को,
चाहे कितनी ही बार बिखेरे हो
तुम कह दो तो ये सागर अपार नहीं लगता
तूफानों से लड़ना यूँ बेकार नहीं लगता

सपनो से भी मेरे वो,
कितनी ही दूरी पर बैठा हो
छू लेने की कोशिश पर,
"नादान" कह के हँस देता हो
पर तुम कह दो तो क्षितिज पहुँच के पार नहीं लगता
सपनो का पीछा करना भी बिन सार नहीं लगता

कुछ तो जादू- मंतर है तुम्हारे इस विश्वास में
कि इस से बढ़कर तो ये संसार नहीं लगता
हालातों का मुझपर कुछ अख्तियार नहीं लगता
बस तुम कह दो तो ...

Apr 28, 2010

काश

काश की कोई जगह ऐसी भी होती

जहाँ मैं बस मैं और तुम बस तुम होते,

बीच में अनकहे लफ़्ज़ों के फ़ासले,

बेचैन सी खामोशियाँ,

और फ़िज़ूल की बातें न होती



यादें आखों से पिघल कर

आहिस्ता आहिस्ता बह जाती

और सपनो के धुंध

उस पल की रौशनी में

खुद को खो देते


काश की कोई जगह ऐसी भी होती

जहाँ मैं बस मैं और तुम बस तुम होते

और बस उस पल में वक़्त और दूरियों के फ़ासले खोते...

Apr 14, 2010

जाने से पहले

बिछड़ने में ही " चाहत क्या है ",
ये समझाने की ताक़त है
कभी समझे नहीं हम प्यार क्या है
फिर भी बस यूँ ही
गुज़र जाने से पहले मुड़ के उनको
देख लेने की हसरत है ...

Mar 24, 2010

ख्वाब

तुम्हारी आवाज़ सुनकर लगता है ऐसे
लम्बे-अँधेरे सफ़र में दूर कहीं,
दिख गया हो कोई दीप जैसे

एक मुलाक़ात से महसूस होता है ऐसे
मेरे ही सपनो की गलियों में कहीं,
कोई मंजिल की राह दिखा गया हो जैसे

कभी कोई ख़याल तुम्हारा दिल को छू जाता है ऐसे
मेरी उम्मीदों के क्षितिज पर कहीं,
मिल गए हों ज़मीन और आसमान जैसे

इन सबके बाद भी अक्सर बस इस सोच में रहता हूँ
"कहीं तुम खुद कोई ख्वाब तो नहीं ?"
ये दिल मुझसे, मैं दिल से अक्सर कहता हूँ